FIA की नई व्यवस्था क्या बदलती है
RacingNews365 के तकनीकी विश्लेषक पाओलो फिलिसेट्टी के अनुसार, FIA की अतिरिक्त विकास और अद्यतन अवसर व्यवस्था, जिसे संक्षेप में ADUO कहा जा रहा है, का पहला दौर मियामी ग्रैंड प्रिक्स तक लागू नहीं हो पाएगा, जैसा पहले सोचा गया था।
यह व्यवस्था तब सक्रिय होती है जब किसी पावर यूनिट निर्माता की बढ़त बाकी प्रतिद्वंद्वियों पर 2 प्रतिशत से अधिक हो जाती है। ऐसे में उस निर्माता को मौजूदा पावर यूनिट में सीमित सुधार करने और अतिरिक्त विकास बजट इस्तेमाल करने की छूट मिलती है। यानी पूरी इकाई को नए सिरे से बनाना नहीं, बल्कि जो है उसी में कुछ और जान फूंकना।
नियम के तहत आकलन हर छह रेस के अंतराल पर होता है। मूल योजना में इसे छठी, बारहवीं और अठारहवीं ग्रां प्री के बाद लागू किया जाना था। लेकिन बहरीन और सऊदी अरब की रेसें रद्द होने से समय-सारिणी गड़बड़ा गई। FIA की शुरुआती योजना मियामी तक पात्र निर्माताओं की घोषणा करने और फिर कनाडा ग्रां प्री से लागू करने की थी, मगर अब उसे फिर से सोचना पड़ रहा है।
सुजुका में किन नामों की चर्चा रही
फिलहाल FIA ने आधिकारिक सूची जारी नहीं की है, लेकिन सुजुका में पिटलेन की चर्चा तीन टीमों की ओर इशारा करती रही। इनमें Ferrari, Audi और Aston Martin को ADUO के लिए योग्य माना जा रहा है। दूसरी तरफ Red Bull Powertrains 2 प्रतिशत की सीमा के भीतर दिख रहा है, इसलिए उसे अतिरिक्त विकास लाभ नहीं मिलने की संभावना है।
Mercedes अभी भी मानक तय कर रही है
मानक फिलहाल Mercedes का W17 तय कर रहा है। इसी के मुकाबले Ferrari, Audi और Aston Martin को सहायता मिलने की संभावना बनती है।
इनमें Ferrari का मामला सबसे मजबूत दिखता है। SF-26 के शुरुआती प्रदर्शन की समीक्षा बताती है कि Mercedes के W17 की तुलना में उसकी सबसे बड़ी कमजोरी पावर यूनिट ही है। ऊर्जा प्रबंधन और आंतरिक दहन इंजन की अधिकतम क्षमता, दोनों मोर्चों पर अंतर दिखाई दे रहा है।
मैरानेलो को भरोसा है कि पावर यूनिट पर लक्षित विकास और मियामी तक आने वाला वायुगतिकीय उन्नयन पैकेज मिलकर यह दूरी काफ़ी घटा सकते हैं। और हाँ, फॉर्मूला 1 में उम्मीदें कम बेचैनी और ज़्यादा समय-सारिणी मांगती हैं, लेकिन यही खेल है।
Ferrari की स्थिति ADUO के बाकी दावेदारों से अलग है, क्योंकि वह Mercedes के प्रतिद्वंद्वियों में अकेली ऐसी टीम है जो अतिरिक्त विकास अवसरों को वास्तविक ट्रैक-प्रतिस्पर्धा में बदल सकती है।
हर टीम की जरूरत अलग है
Aston Martin के सामने चुनौती एकदम अलग है। वह नेताओं को पकड़ने की दौड़ में नहीं, बल्कि ग्रिड के पिछले हिस्से से निकलने की कोशिश में है। Honda की पावर यूनिट में लगातार गति की कमी और कंपन की समस्या टीम को पीछे खींच रही है।
इसलिए Aston Martin के लिए ADUO तुरंत बहुत बड़ा समाधान नहीं बन सकता। टीम संभवतः 2026 को एक लंबा परीक्षण कार्यक्रम मानकर चलेगी, ताकि Honda अधिक बुनियादी बदलाव कर सके और 2027 कार में बेहतर एकीकरण की तैयारी हो सके।
Audi का पहला पूर्ण वर्क्स निर्माता सीजन भी आसान नहीं रहा, लेकिन मैट्टिया बिनोटो के नेतृत्व वाली टीम ADUO का सबसे अधिक लाभ उठाने की स्थिति में दिखती है। उसका लक्ष्य शीर्ष टीमों की रफ्तार पकड़ना नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी स्तर को स्थिर करना है। मौजूदा विकास जरूरतों के हिसाब से यही तर्कसंगत भी है।
अल्पकाल में यह व्यवस्था चैम्पियनशिप की तस्वीर बहुत नहीं बदल सकती। फिलहाल Ferrari ही Mercedes के प्रतिद्वंद्वियों में ऐसी टीम दिखती है जिसके पास ADUO सहायता की जरूरत भी है और उसे असली प्रतिस्पर्धी बढ़त में बदलने की क्षमता भी।
Red Bull का बाहर रहना, जब तक FIA आधिकारिक पुष्टि नहीं करती, उसके पावर यूनिट के अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। टीम की असली चिंता पावर से अधिक वजन वितरण, वाहन गतिकी और वायुगतिकीय संतुलन से जुड़ी है। यानी समस्या है, लेकिन वह उस जगह नहीं जहां यह नया नियम मदद करने आया है।



