किसने क्या सोचा था
शुरू-शुरू में World of Warcraft के क्वेस्ट डिजाइनर यह मान रहे थे कि खेल वही करे जो तब के बड़े MMOs करते थे। मतलब, NPC से वजह बताने की बजाय खिलाड़ी को कुछ दुश्मनों की तरफ इशारा करें ताकि वे बार-बार उन्हें मारकर लेवल अप कर सकें। यह सोच खासकर EverQuest के अनुभव से प्रेरित थी।
प्ले-टेस्ट ने रीयलिटी चेक दिया
टीम ने Blizzard के अंदर एक प्ले-टेस्ट किया जिसमें कई लोग शामिल थे जो MMOs नहीं खेलते थे। कुछ का बैकग्राउंड शूटर गेम्स या रियल-टाइम स्ट्रेटेजी में था। उन्होंने खेल को आजमाया और जल्दी ही शिकायतें आनी शुरू हुईं।
सच्ची प्रतिक्रिया
- प्ले-टेस्टर्स ने कहा कि वे जल्दी ही क्वेस्ट खत्म महसूस कर रहे थे।
- उनका तर्क था कि वे ऐसे खेलों की उम्मीद करते हैं जहाँ क्वेस्ट लगातार मिलते रहें, तो खेल रुके नहीं।
- डिजाइनरों को एहसास हुआ कि EverQuest जैसी डिजाइन हर खिलाड़ी के लिए स्वाभाविक नहीं है।
"मुझे तुरंत क्वेस्ट खत्म हो गए!" जैसी शिकायतें सुनकर टीम ने सोचा कि शायद उनका प्रारंभिक नजरिया सार्वभौमिक नहीं है।
उसका असर क्या हुआ
इस फीडबैक ने टीम को यह समझने में मदद की कि क्वेस्टिंग सिस्टम को ऐसे बनाना होगा जो नए खिलाड़ियों के लिए भी स्पष्ट और लगातार हो। इसका मतलब यह था कि केवल ग्राइंड करने के लिए दुश्मनों की ओर इशारा करना ही पर्याप्त नहीं था।
संक्षेप में: WoW के शुरुआती क्वेस्ट आइडिया EverQuest से प्रभावित थे, पर अंदर के प्ले-टेस्ट ने दिखाया कि हर खिलाड़ी का अनुभव अलग होता है। यही रीयलिटी चेक उस डिजाइन को बदलने की वजह बनी।