ईरान के खेल मंत्री अहमद डोंजामाली ने टेलीविजन पर स्पष्ट तौर पर कहा कि देश यूएसए में होने वाले फूटबॉल वर्ल्ड कप में भाग नहीं लेगा। यह घोषणा खेल से जुड़ी खबर जितनी है, उतनी ही राजनीतिक बयानबाज़ी भी बनी हुई है।

क्यों नहीं भाग लेंगे?

खेल मंत्री ने अपनी बात में कहा कि वर्तमान सरकार ने उनके राष्ट्रीय नेता की हत्या की और इस तरह की घटनाओं के कारण उनका देश वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने का इरादा नहीं रखता। उन्होंने औपचारिक शब्दों में यह भी कहा कि देश पर ‘‘दुष्ट क़दम’’ उठाए गए हैं, जिनमें आठ से नौ महीनों के भीतर दो युद्ध और हजारों नागरिकों की मौतें शामिल हैं।

क्या अमेरिका का पक्ष अलग है?

एक तरफ, अमेरिकी सियासत के कुछ हिस्से यह कहते रहे हैं कि ईरान की टीम प्रतियोगिता में भाग ले सकती है और खेलों को अलग रखना चाहिए। पर ईरानी मंत्री का कहना है कि मौजूदा हालात में भाग लेना संभव नहीं है।

बयान का मतलब

  • ईरान की सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे राजनीतिक और सुरक्षा कारणों से टूर्नामेंट से दूर रहना चाहते हैं।
  • बयान टीवी पर दिया गया और उसमें हिंसा व अस्थिरता के आरोप सीधे तौर पर उठाए गए।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल और राजनीति का सवाल फिर से देखने को मिल रहा है।

यह मामला असल में सिर्फ खेल का नहीं रह गया। जब मैदान पर गोल और बाहर कमेंट्री के लिए तख्तियां हों, तब भी भू-राजनीति से जुड़ी संवेदनशीलताएं खेल पर भारी पड़ सकती हैं। सादे शब्दों में: फुटबॉल का शौक बड़ा है, पर कुछ फैसलों में देश की सुरक्षा और लोगों की ज़िंदगियाँ सबसे ऊपर रहती हैं।

नोट: ईरान के महिला फुटबॉल टीम की वापसी को लेकर भी अनिश्चितता पर चर्चा जारी है, जिससे यह मुद्दा और जटिल बन गया है।