इटली की एक और नाकामी, गत्तूसो ने सवाल टाला
जेनारो गत्तूसो ने इटली के मुख्य कोच के रूप में अपने भविष्य पर कोई साफ जवाब नहीं दिया, क्योंकि अज़्ज़ुरी लगातार तीसरी बार फीफा विश्व कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाए। चार बार की विश्व कप विजेता टीम के लिए यह नतीजा फिर वही पुरानी कहानी लेकर आया, बस स्थान और तारीख बदली हुई थी।
बोस्निया-हर्जेगोविना में 4-1 की पेनल्टी हार के बाद इटली 2018 और 2022 की तरह इस बार भी टूर्नामेंट से बाहर रह जाएगा। 2006 की विश्व कप विजेता इतालवी टीम का हिस्सा रहे पूर्व एसी मिलान मिडफील्डर गत्तूसो को पिछले जून में लुसियानो स्पैलेटी की जगह नियुक्त किया गया था।
गत्तूसो: अभी मेरे भविष्य की बात मत कीजिए
जेनित्सा में मंगलवार की हार को गत्तूसो ने व्यक्तिगत स्तर पर “भारी झटका” बताया और कहा कि वे अपने भविष्य पर चर्चा करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। उनके मुताबिक, इस समय बातचीत इटली, नीली जर्सी और उस एक और झटके पर होनी चाहिए जो टीम के मुताबिक उसे मिलना नहीं चाहिए था।
उन्होंने इतालवी प्रशंसकों से माफी भी मांगी और कहा कि यह बहुत दर्दनाक है। गत्तूसो ने खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा कि इतने सालों बाद उन्होंने नाज़ियोनाले को इतने दिल से खेलते नहीं देखा था।
इटली ने शुरुआत में मोइज़े कीन के गोल से बढ़त बनाई, लेकिन हाफ टाइम से ठीक पहले अलेस्सांद्रो बास्तोनी को मैदान से बाहर कर दिया गया। 79वें मिनट में हारिस तबाकोविच ने बोस्निया-हर्जेगोविना के लिए बराबरी कर दी। इसके बाद मुकाबला पेनल्टी शूटआउट में गया, जहां सिर्फ सैंड्रो टोनाली गोल कर सके। पियो एस्पोसितो की किक ऊपर निकल गई और ब्रायन क्रिस्तांते की कोशिश बार के नीचे से लौट आई। फुटबॉल में कभी-कभी नतीजा भी काफी नाटकीय होना चाहिए, शायद इसलिए यह मैच भी वही कर गया।
FIGC की बैठक और आगे की तस्वीर
इतालवी फुटबॉल महासंघ FIGC अगले हफ्ते बैठक करेगा, जिसमें टीम के भविष्य पर चर्चा होगी। हालांकि FIGC अध्यक्ष गब्रिएले ग्राविना के हवाले से कहा गया है कि वे गत्तूसो और राष्ट्रीय टीम प्रतिनिधि प्रमुख जियानलुइजी बुफ़ोन, जो 2006 की विजेता टीम के गोलकीपर थे, दोनों को पद पर बनाए रखना चाहते हैं।
ग्राविना ने कहा कि उन्होंने गत्तूसो और बुफ़ोन से इस टीम के साथ बने रहने को कहा है और गत्तूसो को उन्होंने एक बेहतरीन मैनेजर बताया। ग्राविना का अपना भविष्य भी सवालों के घेरे में बताया जा रहा है, क्योंकि यह इतालवी फुटबॉल अभी सिर्फ मैदान पर नहीं, दफ्तर में भी असहज दौर से गुजर रहा है।