क्या कहा गया?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेटन्याहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इतिहास यह दिखाता है कि यीशु मसीह का गेंगिस खान पर कोई खास लाभ नहीं है। उन्होंने यह कथन इतिहासकार विल ड्यूरेन्ट के हवाले से बताया। इस टिप्पणी का संदर्भ इज़राइल-ईरान स्थिति और रक्षा नीति पर चर्चा के दौरान था।
उद्धरण का सार
उनके भाषण का महत्वपूर्ण हिस्सा कुछ इस तरह था: "यदि आप काफी ताकतवर, पर्याप्त निर्दयी और बहुत शक्तिशाली हैं, तो बुराई अच्छाई पर हावी हो सकती है।" नेटन्याहू ने यह कहते हुए जोड़ा कि सिर्फ नैतिक होना, न्यायी होना या सही होना कई बार काफ़ी नहीं होता।
क्यों हुआ विवाद?
यह बयान इंटरनेट पर तेजी से फैल गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उस क्लिप ने बड़े पैमाने पर दर्शक जुटाए और कई उपयोगकर्ताओं ने इसे ईसाई समुदाय
नेटन्याहू की सफाई
वायरल होने के बाद नेटन्याहू ने एक पोस्ट में कहा कि उनका उद्देश्य यीशु मसीह का अपमान करना नहीं था और न ही किसी को आहत करने का मन था। उन्होंने कहा कि वे इतिहासकार की कही बात का हवाला दे रहे थे और उनकी मंशा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी।
जरूरी बातें एक नजर में
- कहां कहा: प्रेस कॉन्फ्रेंस जो इजरायल-ईरान मुद्दे पर थी।
- किसने कहा: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेटन्याहू, प्रत्यक्ष रूप से विल ड्यूरेन्ट के हवाले से।
- क्यों विवादित: टिप्पणी को कई लोगों ने धार्मिक भावनाओं का अपमान माना।
- नेटन्याहू की प्रतिक्रिया: उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी को अपमानित करने का नहीं था।
क्या यह नई बात है?
इतिहास में बड़े पैमाने पर किए गए युद्ध और शासकों पर चर्चा अक्सर नैतिकता और शक्ति के बीच के तनाव को रेखांकित करती है। इस मामले में विवाद का केंद्र धार्मिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक बयान मिलने वाली प्रतिक्रिया है।
संक्षेप में, एक ऐतिहासिक उद्धरण ने राजनैतिक चर्चा को भड़का दिया और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया का कारण बना। नेता ने बाद में यह स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाना नहीं था।