एफ1 का रोमांच अब कभी-कभी दिखता है बस बैटरी चार्ज करने जैसा, और इसका व्यंग्य सबसे तीखा सुनने को मिला है Fernando Alonso से। चीन ग्रैंड प्रिक्स से पहले उन्होंने साफ कहा कि Aston Martin-Honda की हालत मेलबर्न जैसी ही है और टीम अभी 'गिरते-उठते' चल रही है।
क्या हुआ? छोटी-छोटी चीज़ें, बड़े-बड़े झटके
Aston के पास कुछ जरूरी स्पेयर पार्ट्स नहीं हैं, इसलिए कुछ सेशन्स में घुमाने के लिए सीमित मौके मिलेंगे। अतिरिक्त सिरदर्द यह है कि पॉवर यूनिट की वाइब्रेशन्स बैटरी को नुकसान पहुंचा रही हैं, और उस नुकसान का असली इलाज अभी बाकी है।
सीधा-सादा सच
- सीमित रनों — टीम को पूरा शेड्यूल मिलना मुश्किल दिख रहा है।
- बेटरी को झटका — पॉवर यूनिट की वाइब्रेशन से बैटरी खराब हो रही है।
- पार्ट्स की कमी — कुछ रिप्लेसमेंट्स नहीं होने की वजह से सेशन्स लिमिटेड रहेंगी।
अलोंसो ने साफ कहा कि टीम अभी "सर्वाइवल मोड" में है और वे उम्मीद कर रहे हैं कि Suzuka तक कोई ठोस समाधान मिल जाए। वहाँ तक, विकास और परफॉर्मेंस की असली जाँच टल रही है क्योंकि बाकी ग्रुप पहले से ही दौड़ कर, विकसित कर और आगे बढ़ रहा है।
Sprint वीकेंड और 'साधारण' उम्मीद
यह दूसरा वीकेंड है जिसमें Sprint है, और Alonso की खुशी की परिभाषा फिलहाल बहुत सिंपल है: साधारण फ्री प्रैक्टिस, साधारण रेस और बस गियर लगाकर कुछ राउंड्स पूरा कर लेना. वे बार-बार कहते दिखे कि सबसे जरूरी चीज़ है गियर घुमाना और मशीन की विंडो समझना।
उनकी बात का पूरा सार यह है: अगर बाकी टीमें हज़ारों राउंड घुमा कर ऑप्टिमाइज़ कर सकती हैं, तो Aston को भी वही मौके चाहिए। वरना, कैसे पता चलेगा उनकी कार किस रेंज में काम करती है?
ड्राइविंग की चुनौती से मैनेजमेंट की दुनिया तक
अलोंसो थोड़े नॉस्टैल्जिक भी रहे। उन्होंने कहा कि पहले की तरह एज-ऑफ-भौतिकी वाली लड़ाइयां कम रह गई हैं। 2012 के दौर की उन मुश्किलों का मजा अब नहीं रहा — जहाँ कोनों पर सीमा पर चलना पड़ता था और ड्राइवर अपनी सीमाएँ चुनौती देते थे।
अब कई कोनों पर खिलाड़ी बैटरी चार्ज कर रहे हैं, समय नहीं बना रहे हैं। संक्षेप में: पहले जहां ड्राइवर की सूझबूझ ही जीत तय करती थी, अब कार का एनर्जी मैनेजमेंट काफी हद तक मैच का नायक बन गया है। अलोंसो ने कहा कि वे पुराने जमाने के ड्राइविंग चैलेंज के पक्ष में रहे हैं।
Aston की उम्मीदें और वास्तविकता
टीम की योजना यह है कि Suzuka तक समस्या का कोई पूरा समाधान आ सकता है, और अगर वह हुआ तो फिर वे परफॉर्मेंस खोजने की अगली फेज़ में जाएंगे। परन्तु असलियत यह है कि उस समय तक बाकी टीमें और भी आगे जा चुकी होंगी।
अलोंसो ने यह भी माना कि पावर के मामले में पीछे रहना कुछ समय चल सकता है, भले ही भरोसेमंदता की समस्याएँ सुलझ जाएँ। फिलहाल वे ऐसे समय में हैं जहाँ हर छोटा-सा रेस पूरा करना ही बड़ा काम है।
बगल की ख़बरें - छोटी पर अहम
- वर्स्टैपेन इस बीच फ़ॉर्मूला 1 के बदलावों का इंतजार करते हुए दूसरी प्रतिस्पर्धाएँ एंजॉय कर रहे हैं - Nürburgring, Spa और Le Mans जैसी जगहों पर उनकी नजरें हैं।
- GP चीन में जिन ट्रैकों पर एक्टिव एयरोडायनामिक्स इस्तेमाल की जा सकेगी, उन हिस्सों को पहले ही तय कर दिया गया है, ताकि रेस में नियंत्रण के मुद्दों को कम किया जा सके।
नतीजा? अगर आप Alonso के शब्दों में सुनें तो कहा जा सकता है: जहाँ कभी हमने गाड़ी चलाते हुए अपनी हिम्मत और रिफ्लेक्स की परीक्षा दी, आज वही कोने कुछ क्षण के लिए बैटरी को 'पावर-अप' करने का ठिकाना बन गए हैं. F1 अभी भी रेस है, पर कहानी की भाषा बदल चुकी है।
फाइनल नोट: Aston की समस्या गाड़ी नहीं, समय की होड़ से जुड़ी है — और वक्त के साथ भरोसा लौटेगा, बस पहले गियर में कुछ और राउंड पूरे होने चाहिए।