हां दोस्तों, टेक कंपनियां अब किताबों में नहीं बल्कि अपने-अपने थिंक-टैंक में बैठकर भविष्य की सोच रही हैं। Anthropic ने भी वही किया: उसने अपने तीन अलग-अलग रिसर्च ग्रुप्स को मिला कर Anthropic Institute नाम का एक नया अंदरूनी थिंक-टैंक बनाया। मकसद साधारण-सी बात है — बड़े पैमाने पर AI के असर को समझना, जैसे कि नौकरियों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, क्या AI हमें सुरक्षित बनाएगा या नए खतरे लाएगा, और क्या हम इसकी नियंत्रण क्षमता बनाए रख पाएंगे।
कौन चला रहा है शो?
किसी को C-suite का पैलेट बदलना पड़ा तो Anthropic ने भी किया। कंपनी के सह-संस्थापक Jack Clark अब नए थिंक-टैंक के प्रमुख बन गए और उनकी नई पदवी है head of public benefit. इससे पहले वह सार्वजनिक नीति के प्रमुख थे। सार्वजनिक नीति टीम अब Sarah Heck संभालेंगी, जो पहले बाहरी मामलों की प्रमुख थीं।
Anthropic वॉशिंगटन, डीसी में अपना ऑफिस खोलने की भी तैयारी कर रहा है, और सार्वजनिक नीति की टीम राष्ट्रीय सुरक्षा, AI इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और लोकतांत्रिक नेतृत्व जैसे मुद्दों पर ध्यान देगी।
समय सही है या बस नाटकीय?
यह कदम एक बड़े सरकारी झगड़े के बीच आया है। कंपनी को आपूर्ति श्रृंखला जोखिम के रूप में चिह्नित किया गया, जिससे सरकार के साथ उसका रिश्ता जटिल हो गया और Anthropic ने इस फैसले के खिलाफ मुकदमा दायर किया। कंपनी का कहना है कि यह टैग डालना अवैध था क्योंकि उन्होंने कुछ सीमा-रेखाएं तय की थीं, जैसे कि घरेलू बड़े पैमाने पर निगरानी और पूरी तरह स्वायत्त घातक हथियारों पर प्रतिबंध।
Jack Clark ने कहा कि यह नया थिंक-टैंक काफी समय से योजना में था और उन्होंने इस तरह की भूमिका के बारे में नवंबर से सोच रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया घटनाएं उनकी पारदर्शिता बढ़ाने की सोच को और पक्का करती हैं।
कौन-कौन हैं पहले से जुड़े?
Anthropic Institute लगभग 30 लोगों के साथ शुरू हो रहा है। शुरुआती सदस्यों में शामिल हैं:
- Matt Botvinick - पहले Google DeepMind से
- Anton Korinek - यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर (अवकाश पर)
- Zoe Hitzig - जिन्होंने OpenAI छोड़ दिया था
थिंक-टैंक में सामाजिक प्रभाव, फ्रंटियर रेड टीम (जो सिस्टम की कमजोरियों को ढूंढती है) और आर्थिक शोध टीमें शामिल की गई हैं। आगे नई टीमें भी बनाई जाएंगी, जैसे कि कानून प्रणाली पर AI के प्रभाव का अध्ययन करने वाली टीम। टीम के मुख्यों के मुताबिक संस्था का स्टाफ हर साल दोगुना होने की उम्मीद है।
पैसा, IPO और जोखिम
बड़े AI धंधों पर इस साल दबाव बढ़ा है और Anthropic भी इससे अछूता नहीं। कंपनी की फाइलिंग्स में कहा गया है कि उसने अब तक 5 अरब डॉलर से अधिक वाणिज्यिक राजस्व कमाया और मॉडल ट्रेनिंग व इन्फरेंस पर लगभग 10 अरब डॉलर खर्च किए।
सरकारी बैन या सीमाओं की व्याख्या पर निर्भर करता है कि कितनी आय खतरे में है। कंपनी ने संकेत दिया है कि कम से कम 2026 के कुछ सौ मिलियन डॉलर का राजस्व जोखिम में है और सबसे खराब हालत में यह अरबों तक जा सकता है। इन सबके बीच Anthropic के IPO की भी खबरें चल रही हैं।
क्या रिसर्च पर असर पड़ेगा?
लोग पूछ रहे हैं कि क्या शॉर्ट-टर्म कमाई के खतरे के बीच लंबे समय की रिसर्च पर निवेश करना समझदारी है। Jack Clark ने कहा कि उन्हें चिंता नहीं है। उनका तर्क है कि सुरक्षा और ट्रस्ट पैदा करने वाली रिसर्च अंततः व्यावसायिक लाभ भी देती है। Anthropic, एक सार्वजनिक लाभ निगम होने के नाते, पारदर्शिता और सार्वजनिक हित पर भी जोर देता है।
कंप्यूट, सोशल साइंस और इंसान-ऑन-AI
Anthropic Institute बड़े सामाजिक शोधों पर भी काम करेगा — जैसे लोग AI पर कितना भावनात्मक निर्भर होते जा रहे हैं। अब तक टीमों ने बातचीत के प्रकारों और AI की मनोवैज्ञानिक प्रभावशीलता को मापा है, लेकिन उपयोगकर्ताओं के अनुभव जानने के लिए बड़े पैमाने पर इंटरव्यूज़ करने की योजना है, कुछ मामलों में AI की मदद से ही।
Jack Clark का कहना है कि हम यह समझना चाहते हैं कि सोशल मीडिया ने समाज पर जैसा असर डाला, उसी तरह AI के उपयोग से लोग कैसे बदलते हैं।
निष्कर्ष
किसी बड़ी कंपनी का थिंक-टैंक बनाना हमेशा दिखावटी लगता है, लेकिन Anthropic की परिस्थिति थोड़ा अलग है: एक तरफ कानूनी और सरकारी चुनौतियां, दूसरी तरफ तेज़ी से बढ़ती AI तकनीक। उन्होंने रिसर्च और पारदर्शिता को बढ़ावा देने का फैसला किया है और कहा जा रहा है कि यह रणनीति लंबी दौड़ में फायदे में रहेगी। अंत में, टेक का खेल आगे बढ़ रहा है और Anthropic यह तय करने की कोशिश कर रहा है कि वह इसमें किस तरह से भरोसा, सुरक्षा और नीति को जोड़कर आगे बढ़े।