इटली के उप-प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर स्पष्ट बात की: जब राष्ट्रीय हित की बात हो, तो देश अपने फायदे देखेगा।
अमेरिका, इटली और होर्मुज
साल्विनी का कहना है कि अगर राष्ट्रपति ट्रम्प ने होर्मुज के मसले पर मदद मांगी है, तो इटली अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से फैसला करेगा। उन्होंने पूछा कि क्या अमेरिका ने इटली को तब शामिल किया जब ईरान पर हमला हुआ था? उनका जवाब था कि ऐसा नहीं लगा, उन्हें घटनाओं के बाद ही बताया गया।
साल्विनी ने ये भी कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि अमेरिका और इजरायल ने इस संघर्ष शुरू करने से पहले इसके नतीजों का पूरा आकलन किया होगा।
युद्ध में भागीदारी नहीं
उनका रुख साफ था: “यह हमारी جنگ नहीं है। हम रूस या ईरान के खिलाफ युद्ध में नहीं हैं।” साल्विनी ने जोड़ा कि युद्ध क्षेत्र में युद्धपोत भेजना दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के नजदीक ले जा सकता है। इसलिए सरकार की सतर्कता का स्वागत करना चाहिए।
ईंधन कंपनियों के साथ बैठक और दामों पर नियंत्रण
साल्विनी ने कहा कि वह और अर्थव्यवस्था मंत्री कल प्रमुख तेल कंपनियों को बुलाएंगे। कारण सीधा है: सट्टेबाज़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साल्विनी का आरोप है कि कुछ कंपनियाँ अतिरिक्त मुनाफा कमा रही हैं, ठीक वैसे ही जैसे कुछ बैंकों ने पिछले वर्षों में किया था।
पिछले साल बैंकों से कुछ अरब यूरो का योगदान लिया गया था, और अगर तेल कंपनियाँ कीमतें नहीं रोकतीं, तो सरकार उनसे भी आर्थिक योगदान मांगने पर विचार कर सकती है। साल्विनी ने स्पष्ट किया कि उन्हें उम्मीद है कि बैठक से कंपनियों की ओर से कुछ प्रतिबद्धताएँ आएँगी।
यूरोप में अलग-अलग रुख
साल्विनी ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ के देशों का रुख ईंधन नीति पर एक जैसा नहीं है। कुछ देश कर संरचना पर विचार कर रहे हैं, जबकि कुछ देश अभी भी रूस से तेल खरीदते रह रहे हैं। साल्विनी के अनुसार यह मुद्दा ब्रुसेल्स स्तर पर फिर से देखा जाना चाहिए।
कुल मिलाकर साल्विनी का संदेश दो हिस्सों में है: विदेश नीति में इटली अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देगा, और घरेलू अर्थव्यवस्था में सरकार ईंधन कीमतों और संभावित सट्टेबाज़ी पर नज़र रखेगी।