संक्षेप में: यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक की टीम ने नासा के TESS टेलीस्कोप के पहले चार साल के डेटा पर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम Raven चलाया। इस प्रक्रिया से 118 बाह्य ग्रहों (एक्सोप्लैनेट) की पुष्टि हुई — यानी सिस्टम ने 100 से अधिक ग्रहों को "समझा" और उनमें से 31 पहले कभी पहचान में नहीं आए थे। इसके अलावा 2000 से अधिक ग्रह उम्मीदवार भी मिले, जिनमें से लगभग 1000 पूरी तरह नए उम्मीदवार हैं।
क्या किया गया और कैसे
TESS तारों की चमक में गिरावट दर्ज करता है जब कोई ग्रह उनके सामने से गुजरता है। Raven नाम का AI इन दर्ज किए गए संकेतों को ऑटोमैटिकली पढ़ता और वर्गीकृत करता है। शोधकर्ताओं ने Raven को पहले चार वर्षों में जमा किए गए 2.2 मिलियन से अधिक लाइट कर्व्स पर चलाया और खासकर उन ग्रहों पर ध्यान दिया जो अपनी स्टार के काफी करीब परिक्रमा करते हैं — यानी जिनका ऑर्बिटल पीरियड 16 दिनों से कम है।
मुख्य खोजें
- 118 एक्सोप्लैनेटों की पुष्टि की गई।
- इनमें से 31 पहले कभी पहचाने नहीं गए थे।
- Raven ने 2000+ संभावित ग्रह उम्मीदवार चिह्नित किए, जिनमें से लगभग 1000 पूरी तरह नए थे।
- डेटा से पता चला कि करीब 10% सूर्य जैसे सितारों के पास कम से कम एक कम दूरी वाला ग्रह होता है।
- समान प्रकार के नेप्च्यून जैसे ग्रह बहुत ही दुर्लभ मिले — केवल लगभग 0.08% सूर्य जैसी ताराओं के आसपास।
किस तरह के सिस्टम रोचक हैं
टीम ने कुछ खास श्रेणियों पर भी प्रकाश डाला:
- वे ग्रह जिनकी परिक्रमा 24 घंटे से भी कम में पूरी होती है।
- "नेप्च्यून डेजर्ट" नाम की वह क्षेत्र जहां नेप्च्यून जैसा ग्रह न्यून ही मिलने चाहिए, पर कुछ ऐसे ग्रह रेडार पर आए।
- ऐसे सिस्टम जिनमें कई ग्रह अपनी मात्री-तारा के बहुत नजदीक, एक साथ परिक्रमा करते हैं।
AI ने क्या खास किया?
Raven सिर्फ अनेकों सिगनल गिनने वाला प्रोग्राम नहीं है। इसे मशीन लर्निंग के जरिए प्रशिक्षित किया गया ताकि वह उन पैटर्नों को पहचान सके जो असली ग्रह-ट्रांजिट और किसी अन्य घटना में फर्क करते हैं। जैसा कि टीम के एक शोधकर्ता ने बताया, मॉडल्स ने यह सिखा कि कौन सा संकेत ग्रह के गुजरने का है और कौन सा शोर या अन्य खलल।
Raven अब सिर्फ एक सूची नहीं देता; यह एक ऐसा उपकरण बन गया है जिसे वैज्ञानिक आगे इस्तेमाल करके अलग-अलग प्रकार के ग्रहों की प्रचलन दर मैप कर सकते हैं और श्रेष्ठ ग्रह प्रणाली चुन सकते हैं जिनका आगे अधिक अध्ययन किया जाना चाहिए।
कहां प्रकाशित हुआ
यह शोध यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया और इसके परिणाम Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित तीन लेखों में आए।
नोट: यह खोज TESS के विशाल डेटासेट और आधुनिक मशीन लर्निंग के संयोजन का उदाहरण है — यानी अब ग्रह खोजने में मनुष्य और मशीन मिलकर तेज और सटीक काम कर रहे हैं।