यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने स्ट्रासबर्ग में संसद को बताया कि मध्यपूर्वी संघर्ष के पहले दस दिन ही ऊर्जा पर भारी पड़े हैं। संक्षेप में: गैस के दाम 50% बढ़े, तेल 27% महंगा हुआ और ये सब मिलकर यूरोप को दस दिनों में लगभग 3 अरब यूरो के अतिरिक्त इम्पोर्ट बिल दे गए। यह साफ संदेश था कि ऊर्जा पर निर्भरता की कीमत चुकानी पड़ती है।

गैस, तेल और 'हमारी कमजोर आदत'

उनका तर्क सरल था। अगर हम फिर से रूसी ऊर्जा पर भरोसा करते हैं तो हम और भी ज़्यादा निर्भर, कमजोर और असुरक्षित बन जाएंगे। घरेलू संसाधन, नवीनीकृत ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा के दाम पिछले दस दिनों में स्थिर रहे, इसलिए नीति की दिशा यही होनी चाहिए कि इन स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाया जाए।

ETS का रोल और उसकी ज़रूरत

वोन डेर लेयेन ने Emissions Trading System, यानी ETS की उपयोगिता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, अगर ETS नहीं होता तो आज हम 100 अरब क्यूबिक मीटर और गैस खर्च कर चुके होते, और इससे हमारी निर्भरता और बढ़ जाती। मतलब ETS चाहिए, पर उसे मॉडर्नाइज भी करना होगा ताकि वह सफल रहे।

कौन से उपाय सम्भावित हैं

  • पावर खरीद समझौते यानी PPAs और कॉन्ट्रैक्ट्स फॉर डिफरेंस का बेहतर उपयोग
  • स्टेट एड के ज़रिये असहाय घरों और बिज़नेस की मदद
  • संभावित सब्सिडी या गैस के दाम पर कैप लगाने के विकल्पों का परीक्षण

सरल भाषा में: बाजार ने काम किया, पर जब गैस बिजली की कीमत तय करता है तो दाम झट से ऊपर जाते हैं। इसलिए कुछ ऐसा तैयार करना होगा जिससे उपभोक्ता पर दबाव कम पड़े।

बिल के घटक: आप क्या देख रहे हैं?

बिजली की बिल में क्या-क्या है, यह भी उन्होंने साफ किया: ऊर्जा की कीमत बिल का सबसे बड़ा हिस्सा है, औसतन 56% से ज्यादा। नेटवर्क चार्ज करीब 18%, कर और लेवी 15%, और कार्बन लागत लगभग 11% है। ये आंकड़े देशों के ऊर्जा मिक्स के हिसाब से ऊपर-नीचे होते हैं।

ग्रिड का जाम: 80 GW और फिर भी कमी

पिछले साल यूरोपीय संघ में 80 गीगावाट से ज़्यादा नवीनीकृत क्षमता लगाई गई, जो रिकॉर्ड है। पर समस्या यह है कि ग्रिड का कनेक्शन सीमित है। रिपोर्ट के मुताबिक जो कनेक्ट हो सकती थी, उसकी छह गुना ऊर्जा अभी नेटवर्क तक पहुंच ही नहीं पा रही। बढ़ती बिजली मांग के साथ यह स्थिति टिकाऊ नहीं है।

कर और नीतियाँ: राष्ट्रों के पास फैसला

कुछ सदस्य देशों में बिजली पर टैक्स बहुत कम हैं, जबकि दूसरे देशों में यह 16% से ऊपर तक हैं। इसलिए इसमें सुधार के मौके हैं, पर कराधान संबंधी निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर आते हैं, और वहां बदलाव की ज़रूरत को बदला जाना होगा।

आने वाला रोडमैप

अगले हफ्ते होने वाले EU नेताओं के शिखर सम्मेलन में यह इशारा दिया गया कि 'एक यूरोप, एक बाजार' नामक रोडमैप जल्द प्रस्तुत किया जाएगा और यह काम 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मध्यपूर्व और ईरान पर गंभीर शब्द

जब बात ईरान और व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता की आई तो भाषण का अंदाज गंभीर रहा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि ईरानी जनता की आज़ादी, गरिमा और अपने भविष्य का चुनाव करने का हक़ है। उन्होंने याद दिलाया कि हाल के दमन में हजारों लोगों की मौत हुई है और पिछले दशकों में भी जनहित और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन हुए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान ने क्षेत्र में हिंसा और आतंकवाद को समर्थन दिया और रूस के युद्ध प्रयासों में भी सहायता की। इस हिस्से में व्यंग्य कम और सावधानी ज़्यादा थी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ: सहमति और नाखुशी दोनों

विभिन्न राजनीतिक समूहों और देशों ने भाषण पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। स्पेन की सरकार ने कुछ संतोष जताया और कहा कि आज का भाषण अधिक आरामदायक था। लेकिन विपक्षी और कुछ राजनीतिक समूहों ने आलोचना की।

  • यूरोपीय सोशलिस्ट्स ने कहा कि किसी भी नागरिक की मौत के प्रति चुप न रहना चाहिए और बुनियादी मानवीय संवेदनाएँ अहम हैं।
  • कुछ दिक्कतें रखने वाले सांसदों ने यूरोप से कहा कि वह अमेरिका की नीतियों का उपठेकेदार न बने, और खुद की कूटनीतिक शक्ति बढ़ाए।
  • दूसरी तरफ़ कुछ सांसदों ने इजरायल और लेबनान-हीज़बुल्लाह के संदर्भ में सुरक्षा सोच की बात कही और अपने-अपने नज़रिये से बहस की।

संक्षेप में, भाषण ने साफ किया कि यूरोप ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क है, नीतिगत सुधारों की ज़रूरत मानी जा रही है और मध्यपूर्वी घटनाओं पर यूरोप के भीतर गहरी बहस चल रही है।

टिप्पणी: यह रिपोर्ट सूचना देने के मकसद से है। ऊर्जा, सुरक्षा और मानवीय मुद्दे संवेदनशील हैं, इसलिए इन पर बातचीत में सावधानी और संतुलन की ज़रूरत हमेशा बनी रहती है।