शंघाई में आगमन

ताइवान की प्रमुख विपक्षी नेता और कुओमिनतांग की अध्यक्ष चेंग ली-वुन आज शंघाई पहुंचीं। चीनी मीडिया, जिनमें सिन्हुआ भी शामिल है, के मुताबिक वह 12 अप्रैल तक चीन में रहेंगी और दोनो तटों के बीच शांति को बढ़ावा देने की बात कर रही हैं। राजनीति में शांति की अपील अक्सर बड़ी उपयोगी मानी जाती है, खासकर जब उसके साथ कई दूसरी व्याख्याएं भी चल रही हों।

ताइपे की चिंता

ताइपे सरकार ने चेतावनी दी है कि बीजिंग इस यात्रा का इस्तेमाल अमेरिका से ताइवान के लिए हथियारों की बिक्री रोकने की कोशिश में कर सकता है। अमेरिका ताइवान का सबसे अहम सुरक्षा समर्थक माना जाता है, इसलिए यह आशंका वहां हल्के में नहीं ली जा रही।

चेंग की यह यात्रा इसलिए भी ध्यान खींच रही है क्योंकि वह 2016 के बाद चीन जाने वाली कुओमिनतांग की पहली कार्यरत नेता हैं। इससे पहले, उन्होंने यह भी ज़ोर दिया था कि यदि वह बाद में अमेरिका जाएं, तो उससे पहले शी जिनपिंग से मुलाकात होना जरूरी है।

पार्टी के भीतर भी सवाल

चेंग पर उनके आलोचक, जिनमें अपनी पार्टी के कुछ लोग भी शामिल हैं, यह आरोप लगाते रहे हैं कि वे चीन के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम रुख रखती हैं। यह आरोप नया नहीं है, लेकिन हर बार थोड़ा और स्पष्ट होकर लौट आता है।

शंघाई एयरलाइंस के विमान से उतरते समय का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें चेंग को फूलों का गुलदस्ता दिया जाता है और फिर वह आगे बढ़ जाती हैं।

रवाना होने से पहले का संदेश

शंघाई के लिए रवाना होने से पहले चेंग ने संवाददाताओं से कहा कि ताइवान को युद्ध के खतरे को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। ताइपे में कुओमिनतांग मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, "शांति बनाए रखना ही ताइवान को बनाए रखना है।"

उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्षों को चरणबद्ध तरीके से सद्भावना बढ़ानी चाहिए और आपसी भरोसा मजबूत करना चाहिए।