सावधान: इस लेख में फिल्म के बड़े स्पॉयलर शामिल हैं.
छोटी शुरुआत, बड़ा फाइनल
अगर आप Peaky Blinders को सीरीज के रूप में जानते हैं, तो इसे 1940 की पृष्ठभूमि में सेट करने वाला स्पिन-ऑफ फिल्म The Immortal Man उसी दुनिया का नया अध्याय है। टॉमी शेल्बी (सिलियन मर्फी) लगभग अकेला और अपराध की दुनिया से हटकर अपने किलों में बैठा है। उसकी ज़िंदगी में टकराव तब शुरू होता है जब उसका बेटा ड्यूक शेल्बी (बेरी कीओघन) बिना सोचे समझे गैंग चला रहा होता है और नाज़ी जर्मनी उसे ब्रिटिश अर्थव्यवस्था नष्ट करने की साज़िश में इस्तेमाल करने लगते हैं।
फिल्म की रेखा संक्षेप में
- कहानी 1940 में शुरू होती है, छह साल बाद सीरीज के अंत से।
- ड्यूक नाज़ियों के लिए नकली नोट फैलाने की योजना का हिस्सा बन जाता है।
- यह योजना असल जिंदगी के ऑपरेशन बर्नहार्ड पर आधारित है, जिसमें नाज़ियों ने करोड़ों पाउंड के नकली नोट बनाए थे।
- टॉमी आखिरकार अपने तार्किक दिमाग से इस साज़िश का पुलिंदा खोलता है, लेकिन मिशन के दौरान वह गोली लगने के बाद मरता नहीं है बल्कि मरते हुए अपने बेटे से अनुरोध करता है कि उसे दर्द से निजात दें।
- अंत में पैसा जलता है और टॉमी का विदा दृश्य थिएटर में देखने पर भावुक कर देता है, जैसा कि लेखक ने इरादा भी रखा था।
टॉम हार्डी और वो कटे हुए ट्विस्ट
अल्फी सोलोमंस (टॉम हार्डी) फैंस के सबसे पसंदीदा किरदारों में से रहे हैं। Peaky Blinders में टॉमी और अल्फी की जोड़ों-सीन्स इतने सघन थे कि लेखक स्टेवन नाइट ने सोचा था कि क्या अगर हम यह दिखा दें कि अल्फी असल में मर चुका है और केवल टॉमी ही उसे देख रहा है।
नाइट ने खुद बताया कि यह विचार उन्होंने नज़रों में रखा था: "हो सकता है वह प्रकट हो और हमें पता चले कि वह पूरे समय मर चुका था". लेकिन उन्होंने इसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया। इसलिए अल्फी जैसा व्यक्ति स्क्रीन पर मौजूद रहता है, पर यह जानकर कि यही एक आइडिया था जो फिल्म से बाहर कर दिया गया।
आर्थर शेल्बी और अन्य गैर-मौजूद चेहरे
आर्थर शेल्बी (पॉल एंडरसन) फिल्म में सीधे तौर पर मौजूद नहीं हैं। नाइट ने बताया कि फिल्म की कहानी ने तय किया कि टॉमी के अंदर ऐसा कुछ होना चाहिए जिसका उसे खुद से माफ़ नहीं किया जा सकता। ऐतिहासिक तौर पर फिल्म में दिखाया गया है कि टॉमी ने 1938 में आर्थर को मार दिया था और यह हिस्सा केवल छोटे फ्लैशबैक के जरिए दिखता है, बिना आर्थर का चेहरा ठीक से दिखाए।
कहानी की केंद्रता के कारण कई पुराने किरदार वापस नहीं आए। फिल्म छोटे, केन्ट्रल इमोशन्स और टॉमी-ड्यूक की गतिशीलता पर केंद्रित है, इसलिए विस्तार के लिए समय नहीं बचा।
ऑपरेशन बर्नहार्ड - नकली नोटों का असली इतिहास
फिल्म का नकली नोट वाला प्लॉट असल इतिहास पर आधारित है। नाज़ियों ने ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने के लिए बड़ी मात्रा में नकली नोट बनाए थे, जिसे ऑपरेशन बर्नहार्ड कहा गया। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने युद्ध के दौरान कुछ नोटों को वापस ले लिया और बाद में नोटों का डिज़ाइन बदला गया क्योंकि बाजार में नकली नोट फैल चुके थे। यह वास्तविक जालसाज़ी फिल्म में घटनाओं को आगे बढ़ाने वाला प्रमुख तत्व है।
थिएटर में विदाई - लेखक का इरादा
स्टेवन नाइट और सिलियन मर्फी चाहते थे कि टॉमी का अंत थिएटर के बड़े पर्दे पर दर्शक समुदाय के साथ महसूस किया जाए। फिल्म ने पहले कुछ बुटीक थिएटरों में सीमित अवधि के लिए रिलीज़ पाई और फिर स्ट्रीमिंग पर आई। नाइट ने कहा कि जब दर्शक थिएटर में टॉमी के विदाई दृश्य पर रुंधे गले रोते हैं, वह वही सही अनुभव है जिसे उन्होंने इरादा किया था।
आगे की कहानी - 1953 सेट सीक्वल
नाइट पहले ही 1953 में सेट एक नई सीक्वल सीरीज़ पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि The Immortal Man के कुछ किरदार उस सीरीज़ में दिखाई देंगे, खासकर ड्यूक शेल्बी। लेकिन अभी उन्होंने विस्तार से बात करने से परहेज़ किया, और यह स्पष्ट नहीं कि बेरी कीओघन वही बुजुर्ग ड्यूक निभाएंगे या कोई और।
छोटे-छोटे किस्से और लेखक की बात
- सिलियन मर्फी के हालिया ऑस्कर जैसी उपलब्धियों से फिल्म की प्रोफ़ाइल बढ़ी, पर उनका मानना है कि बजट तुरंत बढ़ना आसान नहीं होता।
- नाइट फ्रैंचाइज़ी के कामों में भी शामिल रहे हैं, जैसे जेम्स बॉन्ड और कुछ अन्य प्रोजेक्ट्स। वे नए तरह के काम करने से जिज्ञासु रहते हैं, इसलिए कभी-कभी बड़े ब्रांड वाले प्रोजेक्ट्स भी आ जाते हैं।
- लेखन नियम उनके लिए सरल है - सुबह उठो और लिखो। यही तरीका उन्हें उत्पादक बनाता है।
निष्कर्ष
Peaky Blinders: The Immortal Man टॉमी शेल्बी की कहानी का एक नतीजा देता है जो व्यक्तिगत अपराधबोध, युद्ध के असर और परिवार की सुरक्षा के बहाने बड़े राजनीतिक खतरे से भिड़ता है। और हाँ, जो अल्फी-ट्विस्ट कट गया, उसने फैंस को थोड़ी साजिश और अफ़सोस दोनों दे दिए।
फिल्म अब स्ट्रीमिंग पर उपलब्ध है और नाइट 1953 की नई सीरीज़ पर काम कर रहे हैं।