नासा ने इस साल दूसरी बार अपना विशाल चंद्र रॉकेट हैangar से बाहर निकालकर लॉन्चपैड तक ले जाया है। उद्देश्य साफ है: अगले महीने चार अंतरिक्षयात्रियों को चाँद के चारों ओर भेजना, बगैर लैंड किए सीधे पृथ्वी पर वापसी।

क्यों यह कदम जरूरी था

Artemis II की उड़ान पर यह अभियान पहले ही देरी का शिकार हो चुका था। रॉकेट में हाइड्रोजन ईंधन लीक और हीलियम लाइनों में जाम आ जाने के कारण मिशन को करीब दो महीने टालना पड़ा। तकनीशियन लीक को लॉन्च पैड पर ठीक कर पाए, लेकिन हीलियम संबंधी समस्या केवल व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में ही ठीक की जा सकी, इसलिए फरवरी के अंत में रॉकेट को वापस रोल करना पड़ा।

रॉकेट की यात्रा

रॉकेट की लंबाई 98 मीटर है, यानी लगभग 322 फीट। इसे रात भर धीमी रफ्तार से 6.4 किलोमीटर यानी चार मील तक उस विशाल क्रॉलर पर ले जाया गया जो अपोलो युग से इस्तेमाल में है। सामान्यत: यह लगभग 12 घंटे की यात्रा थी, लेकिन तेज हवा की वजह से शुरुआत में कुछ घंटों की देरी हुई।

क्रू और मिशन का स्वरूप

Artemis II का चालक दल इस सप्ताह ह्यूस्टन में क्वारंटीन में गया है। टीम में तीन अमेरिकी और एक कैनेडियन अंतरिक्षयात्री शामिल हैं। उनका काम चंद्रमा के पास उड़ान भर कर वापसी सुनिश्चित करना है। मिशन मूल रूप से अब तक पूरा हो चुका होना चाहिए था, पर तकनीकी रुकावटों ने तालिका बदल दी।

कार्यक्रम में ताजा बदलाव

नासा के नए प्रशासक जेराड आइजैकमैन ने हाल ही में Artemis कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। प्रदर्शन की धीमी गति और अंतरालों से नाखुश होकर उन्होंने अगले वर्ष पृथ्वी की कक्षा में एक अतिरिक्त अभ्यास उड़ान जोड़ दी। यह नया अभ्यास अब Artemis III कहलाता है और चंद्र लैंडिंग अब Artemis IV में शिफ्ट कर दी गयी है। आइजैकमैन का लक्ष्य 2028 में कम से कम एक और शायद दो चंद्र लैंडिंग कराना है।

जोखिम, तैयारियाँ और उपठेकदार

  • सुरक्षा पर चिंता: नासा के इंस्पेक्टर जनरल ने पहले चेतावनी दी थी कि चंद्र दलों के लिए बचाव योजना की आवश्यकता है।
  • दक्षिण ध्रुव का जोखिम: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास की स्थलाकृति अपोलो मिशनों के पास की तुलना में ज्यादा खुरदरी और जोखिम भरी है।
  • लैंडर की तैयारी: लैंडर बनाने वाले ठेकेदारों, स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजन, दोनों ने 2028 की लक्षित तारीख पर खरा उतरने के लिए अपनी गति बढ़ा दी है।

आगे क्या उम्मीद रखें

अगर अभी की की गई मरम्मत टिकती हैं और मौसम समेत बाकी सब सही रहा, तो नासा की योजना के अनुसार Space Launch System 1 अप्रैल के आसपास फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भर सकता है। यह एक परीक्षण-लड़ाई जैसा कदम होगा जो भविष्य के चंद्र मिशनों की नींव रखेगा।

संक्षेप में, नासा ने रॉकेट को फिर से लॉन्चपैड तक पहुंचा दिया है, कुछ तकनीकी समस्याएं सुलझ गई हैं और बाकी मुद्दों पर भी काम चल रहा है। अगले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि क्या यह सब योजना के मुताबिक चलता है या फिर और सुधारों की जरूरत पड़ेगी।