यूरोप में पटकथा लेखकों का एक संघियत समूह बुधवार को एक रिपोर्ट लेकर आया है जो बताती है कि कैसे कुछ कठोर दक्षिणपंथी ताकतें सार्वजनिक प्रसारकों पर हमला करके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कलात्मक आजादी पर असर डाल रही हैं। यह समूह 25 देशों के 31 पटकथा लेखकों की गिल्ड और यूनियनों का प्रतिनिधित्व करता है।
रिपोर्ट का सार
61 पन्नों की रिपोर्ट जिसका शीर्षक “Right to Write” है, यह दर्शाती है कि कई सरकारें एक तयशुदा तरीका अपना रही हैं जिससे वे मीडिया और सांस्कृतिक संस्थाओं को नियंत्रित कर पाती हैं। रिपोर्ट यह कहती है कि ये कदम सीधे तौर पर रचनाकारों पर दबाव डालते हैं और उन्हें आत्म-संयमित होने पर मजबूर करते हैं अगर वे काम पाना चाहते हैं।
रिपोर्ट ने जिन तरीकों का जिक्र किया है
- पत्रकारिता को अवैध ठहराना
- आलोचकों को डराना
- मीडिया प्रभाव को संकेंद्रित करना
- नियामक संस्थाओं का राजनीतिक उपयोग
- सांस्कृतिक संस्थाओं का राजनीतिज्ञ बनाना
- सार्वजनिक संस्थाओं की फंडिंग बंद करना या उन्हें कब्जे में लेना
कहां पर यह देखा जा रहा है
रिपोर्ट में खास तौर पर हंगरी, पोलैंड, चेक गणराज्य, बुल्गारिया और स्लोवाकिया जैसी जगहों के उदाहरण दिए गए हैं। इन देशों में प्रयुक्त तरीके आमतौर पर निम्न हैं:
- फंडिंग वापस लेना या घटाना
- ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस को चुनौती देने या रद्द करने की धमकी
- सार्वजनिक प्रसारकों में निष्ठावान लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करना
क्यों यह चिंता की बात है
रिपोर्ट के फॉरवर्ड में पूर्व संघ अध्यक्ष कारोलिन ओट्टो लिखती हैं कि कई दक्षिणपंथी और पॉपुलिस्ट पार्टियां सार्वजनिक सेवा प्रसारण को कमजोर या बंद करने की इच्छा रखती हैं, या यदि सत्ता में हों तो उसे अपनी एजेंडा के अधीन कर देती हैं।
वह यह भी बताती हैं कि इन समूहों का लक्ष्य अक्सर एक ऐसी राष्ट्रीय कथा को बढ़ावा देना होता है जो वास्तविकता से हटकर एक आदर्शीकृत अतीत दिखाती है, और वे उन कहानियों को सेंसर करने की कोशिश करते हैं जो इस तस्वीर में फिट नहीं बैठतीं। इसका नतीजा यह होता है कि रचनाकारों के सामने चुनिंदा विषय ही सुरक्षित रहते हैं और व्यापक आत्म-संयम की स्थिति बन जाती है।
उद्योग की प्रतिक्रिया
बीजियन प्रोडक्शन कंपनी की प्रतिनिधि हेलेन पर्क्वी का कहना है कि यह स्थिति चिंता योग्य है। उन्होंने अमेरिका में घट रही घटनाओं की ओर इशारा करते हुए बताया कि यूरोप में भी ब्रॉडकास्टर्स अब अधिक सतर्क और रूढ़िवादी हो रहे हैं। इसका असर यह है कि स्क्रीन पर विविधता और हाशिए पर रहने वाले समूहों की कहानियों को कम मौका मिलता है।
पर्क्वी की एक टिप्पणी यह भी रही कि उद्योग में कुछ जगहों पर परंपरागत, अक्सर बदली हुई ताकतों का रुझान फिर से दिख रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक प्रसारकों को एक संतुलन बने रखने की भूमिका निभानी चाहिए ताकि व्यावसायिक नेटवर्क और वैश्विक स्ट्रीमर्स के मुकाबले साहसिक और विविध आवाजें बनी रहें।
आर्थिक महत्व और आँकड़े
सार्वजनिक प्रसारक यूरोपीय टीवी फिक्शन निर्माण के लिए प्रमुख फंडिंग स्रोत हैं। 2023 में फिक्शन सीरीज़ कमिशनों में सार्वजनिक प्रसारकों का योगदान लगभग 55% था, जबकि वाणिज्यिक प्रसारकों का 31% और वैश्विक स्ट्रीमर्स का 14% था। उसी साल सार्वजनिक प्रसारकों ने समाचार और खेल अधिकारों को छोड़कर ओरिजनल यूरोपीय कंटेंट पर लगभग €7.2 बिलियन खर्च किया।
फिल्म फंडिंग में भी राज्य सब्सिडी और कर प्रोत्साहन महत्वपूर्ण हैं। संघ के अनुमान के अनुसार 2022 में थिएटरिकल लाइव-एक्शन फीचर फिल्मों की कुल प्रोडक्शन लागत का करीब 27% सार्वजनिक फंड से आया और अतिरिक्त 20% कर तथा अन्य प्रोत्साहनों से आया।
कला और आलोचना पर असर
ओट्टो रिपोर्ट में लिखती हैं कि सार्वजनिक प्रसारकों पर राजनीतिक हस्तक्षेप यूरोप के ऑडियोविजुअल कमीशनिंग और प्रोडक्शन फंडिंग के एक केंद्रीय स्तंभ को कमजोर कर रहा है। उनका कहना है कि प्रसारकों को विशेष रूप से उन सामग्री पर राजनीतिक रूप से प्रेरित हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए जो सरकार की आलोचना करती हों या समकालीन जीवन की समस्याओं पर टिप्पणी करती हों।
उदाहरण और समारोह
साल के बड़े टेलीविजन समारोहों में अक्सर ऐसे शो शामिल होते हैं जो सरकार, न्यायव्यवस्था या इतिहास के संवेदनशील पहलुओं पर सवाल उठाते हैं। इस वर्ष के चयन में कुछ उदाहरण हैं: बेल्जियम की The Best Immigrant, स्वीडन की The Burden of Justice, और स्पेन की Anatomy of a Moment. ये कहानियाँ दर्शाती हैं कि आलोचनात्मक टिप्पणी और संवेदनशील विषय अभी भी मंच पर हैं, लेकिन रिपोर्ट के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि भविष्य में ऐसी परियोजनाओं के लिए जोखिम बढ़ सकते हैं।
Series Mania समारोह इस वर्ष 27 मार्च, 2026 तक चल रहा है।
निष्कर्ष
रिपोर्ट का संदेश साफ है: सार्वजनिक प्रसारकों की स्वतंत्रता बचाने से न केवल पत्रकारिता और सूचना का मर्यादा बनती है, बल्कि कला और विविध कहानियों के लिए जरूरी वित्तीय और संस्थागत समर्थन भी सुरक्षित रहता है। यदि ये संस्थान राजनीतिक दबाव के समक्ष नतमस्तक हो जाएं तो रचनात्मक क्षेत्र में विमर्श और सवाल दोनों संकुचित हो सकते हैं।
सरल बात: सार्वजनिक प्रसारण सिर्फ चैनल नहीं है, यह प्लेटफॉर्म है जहां समाज अपनी कहानियों और आलोचनाओं के जरिए खुद को समझता है। उसे बचाना इसलिए जरूरी है ताकि अलग-अलग आवाज़ें बनी रहें।