यह कहानी आसान शब्दों में ऐसी है: एक किशोरी के पास एक आइडिया था, और एक बहुत ही जानेमाने अभिनेता ने उसे सच करने में मदद की। नाम है बायांका मिशेल-अविला और उनकी डॉक्यूमेंट्री का नाम है Madwoman’s Game, जिसकी वर्ल्ड प्रीमियर 16 अप्रैल को मियामी फिल्म फेस्टिवल में होनी है।

कहानी कैसे शुरू हुई

सभी कुछ 2020 में शुरू हुआ जब बायांका के विचारों पर आधारित एक लेख आया था, जिसमें उन्होंने नेटफ्लिक्स के शो The Queen’s Gambit पर अपनी राय दी थी। लेकिन सोशल मीडिया पर उससे जुड़ी प्रतिक्रियाएं अक्सर नकारात्मक और महिलाओं के खिलाफ थीं। इससे वह पीछे नहीं हटीं। उनसे मन में एक सवाल उठ गया कि शतरंज में महिलाओं की कहानियां कैसे अलग दिखती हैं और क्यों जुटानी चाहिए।

केआनू ने कैसे मदद की

बायांका के माता-पिता ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि 2021 में, घर के किचन टेबल से काम करते हुए, उन्होंने अपना विजन केआनू के सामने रखा। कहा जाता है कि केआनू को यह आइडिया बहुत पसंद आया और उन्होंने फिल्म के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में जुड़ने का फैसला किया।

महत्वपूर्ण बातें:

  • केआनू ने हाई स्कूल में शतरंज खेला था और उन्होंने बायांका का मार्गदर्शन कई सालों तक किया।
  • उनका सहयोग सिर्फ क्रेडिट तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने के लिए इंडस्ट्री में नेविगेट करने में मदद की।
  • माता-पिता ने बताया कि केआनू ने पाछले पांच सालों से मेंटरशिप की है, और प्रोजेक्ट उनके बिना संभव नहीं होता।

पूरा किस्सा कि केआनू कैसे शामिल हुए, वह माता-पिता जल्द ही साझा करेंगे, फिलहाल उन्होंने सिर्फ यह कहा कि केआनू ने सुनते ही सब कुछ करने की कोशिश की ताकि यह फिल्म बन सके।

पिच वीडियो और समर्थन

2021 में एक पिच वीडियो अपलोड किया गया था जिसका शीर्षक था 'Welcome to The Madwoman’s Game'। उस समय बायांका सिर्फ 16 साल की थीं और वीडियो में उन्होंने बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री कैसे बनी और किन खिलाड़ियों से बातचीत की वादा किया गया है।

  • फिल्म के लिए जेनिफर शहादे और अलेक्ज़ान्द्रा बोतेज़ जैसी नामी महिला शतरंज खिलाड़ियों का समर्थन दर्ज है।

फिल्म का विचार और क्या उम्मीद रखें

डॉक्यूमेंट्री की आधिकारिक रूपरेखा बताती है कि यह बायांका की यात्रा का अनुसरण करती है। वह शतरंज को केवल प्रतिस्पर्धा के तौर पर नहीं देखतीं, बल्कि उसे जीवन को समझने और जीने का एक ढांचा मानती हैं। फिल्म में यात्रा, मेंटरशिप और विश्वस्तरीय महिला खिलाड़ियों के साथ मैच शामिल हैं, और यह खोज की जाती है कि शतरंज की सीखें बोर्ड के परे कैसे काम आती हैं।

केंद्रीय सवाल यह है: अगर जीवन शतरंज जैसा है, तो हम इसे कैसे खेलते हैं।

संक्षेप में, यह एक व्यक्तिगत और खेल-केंद्रित कहानी है जिस पर एक प्रसिद्ध अभिनेता ने लगातार मदद की ताकि वह बड़े परदे पर पहुंच सके। देखने लायक है कि कैसे एक युवा फिल्ममेकर का अकेला आइडिया बड़ी परियोजना बनकर सामने आता है।