सीधे शब्दों में: क्या हुआ?

हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सिज्जार्थो ने माना है कि वे मॉस्को से नियमित संपर्क में रहे हैं, यहां तक कि यूरोपीय संघ की बैठकों के समय भी। यह कबूलियत वाशिंगटन पोस्ट की खबरों की पुष्टि करती है।

उन्होंने क्या कहा?

एक चुनावी कार्यक्रम में केज़थेली में बोलते हुए, सिज्जार्थो ने कहा कि ईयू के ऊर्जा, उद्योग और सुरक्षा से जुड़े फैसले सीधे तौर पर बाहरी साझेदारों के साथ रिश्तों को प्रभावित करते हैं। उनके शब्दों में, इन मुद्दों पर ईयू से बाहर के पार्टनरों के साथ चर्चा करना जरूरी है।

  • उन्होंने बताया कि वे सिर्फ रूस के विदेश मंत्री से ही नहीं, बल्कि अमेरिकी, तुर्की, इजरायली और सर्बियाई साझेदारों से भी काउंसिल की बैठकों से पहले और बाद में बात करते हैं।
  • पिछले दिनों उन्होंने इन आरोपों को "फेक न्यूज" कहा था, लेकिन इस बार उनका रुख बदल गया और उन्होंने संपर्क की बात स्वीकार कर ली।

सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उनकी राय

सोशल मीडिया पर उन्होंने उन आरोपों का खंडन किया कि उन्होंने ईयू के सुरक्षा प्रोटोकॉल उल्लंघन किए। उनका तर्क था कि मंत्रिस्तरीय स्तर पर ‘‘राज़’’ ही चर्चा का विषय नहीं होते। उन्होंने कहा कि लगभग सभी मंत्री बैठक में अपना फोन लेकर जाते हैं, सिवाय उनके के, और सख्त नियम लगाने का विचार उन्होंने "शुद्ध पागलपन" बताया।

छोटी टिप्पणी

यह मानना मुश्किल नहीं कि जब विदेश नीति के विषय घरेलू और बाहरी हितों से जुड़े हों, तो बातचीत स्वाभाविक है। फिर भी, सार्वजनिक भाषा और पहले की नकारात्मकता के बाद आज की कबूलियत राजनीतिक चर्चा को तेज कर देगी।